संत कबीर साहिब

                    संत कबीर साहिब

     ।। आओ जानते हैं कबीर साहिब के बारे में ।।



संत कबीर साहिब भारत देश के महान संतो में से एक है जिनके तुल्य पृथ्वी पर कोई संत नहीं हुआ है कबीर साहिब के बारे में आपने बहुत सी दंत कथा सुन रखी होंगी लेकिन हम उनकी वास्तविक सच्चाई के बारे में बताने जा रहे है....
→संत कबीर साहेब का जन्म ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455(सन 1398) सोमवार को लहर तारा तालाब काशी में एक कमल के फूल पर अपने निज स्थान सतलोक से आये थे तथा नीरु ओर नीमा नाम के जुलाहे को मिले थे ।

।गरीब, काशीपुरी कस्त किया,उतरे अधर उधार ।
मोमन कूं मुजरा हुवा, जंगल मे दीदार ।।
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदी छोड़ कहाय ।
सो तो एक कबीर है, जननी जन्या न माय ।।
धीरे-धीरे कबीर साहिब जी बड़े हुये तथा उन्होने कंवारी गाय के दूध से परवरिश लीला की प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में ।
संत कबीर साहेब ने इस पृथ्वी लोक पर 120 साल तक विभिन्न लीलाये की ओर सशरीर अपने निज स्थान सत्यलोक गमन कर गए ।
कबीर साहिब ने मनुष्यों को अपने जीवन का महत्व बताया और मनुष्य जीवन मे झेल रहे भयंकर कष्टों के निवारण के उपाय भक्ति से बताया वो अपने आप परमेश्वर होते हुए भी एक सतगुरु की भूमिका कर रहे थे । उन्होंने समाज मे व्याप्त बुराइयों को दूर करने का संदेश दिया था आपसी प्रेम को कायम किया ।

हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाण भी दिया गया है कि कबीर साहिब की वो पूर्ण परमात्मा है जिन्होंने हमारी पृथ्वी सहित सर्व ब्रह्मांडो की रचना की है। यह सुनकर आपको हैरानी अवश्य होगी क्योंकि आपने यह पहली बार सुना है क्योंकि आज तक आपने केवल सुनी सुनाई बातों पर ज्यादा विश्वास किया है लेकिन हम आपको प्रमाण सहित बताने जा रहे है कि इस सृष्टि की रचना किस प्रकार हुई तथा किसने की यह सब प्रमाण हमारे धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है लेकिन ये हमारे सामने अभी तक नही आई है क्योंकि हमको कोई बताने वाला नहीं मिला । इस कारण स्वयं कबीर साहिब ही इस पृथ्वी पर आये और उन्होंने हमको बताया कि इस पृथ्वी की सृष्टि करने वाला मैं ही हूँ लेकिन उस समय हमारे पूर्वज अशिक्षित थे और कुछ विद्वत्ता के भूखे लोगों ने उनको भृमित कर दिया तथा उनको सच्चाई से दूर कर दिया । वर्तमान समय मे सर्व मानव समाज शिक्षित है अब स्वयं अपने धार्मिक ग्रंथों को पढ़ व समझ सकता है तथा किसी की सुनी सुनाई बातों पर विस्वास नही करेगा ।


तीन चरण चिंतामणि साहेब, शेष बदन पर छाए ।
माता, पिता,कुल न बंधु, ना किन्हें जननी जाए ।।

आदरणीय दादू साहेब जी कह रहे हैं कि :-

     जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार ।
         दादू दूसरा कोए नहीं, कबीर सर्जनहार ।।

कबीर साहिब जी के बारे में तथा उनके पंथो के बारे में विशेष जानकारी के लिए आप पुस्तक ""यथार्थ कबीर पंथ परिचय" पढ़ सकते है...

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संत कबीर साहिब जी का नारा था कि....

              जीव हमारी जाती है मानव धर्म हमारा ।
          हिंदु मुस्लिम सिक्ख इसाई धर्म नहीं कोई न्यारा ।।

संत कबिर साहिब की जीवन की लीलाओं तथा उनके भगवान होने के प्रमाण के लिए आपको एक वीडियो लेकर आये है जो सभी धर्मों के शास्त्रों से प्रमाणित होगी ।
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